बिहार में क्यों ‘खंड-खंड’ हो रहा महागठबंधन?

सिवान | बिहार (Bihar) में महागठबंधन के दलों की आपसी महत्वाकांक्षाओं के टकराव के कारण महागठबंधन (Grand Alliance) बिखराव की कगार पर खड़ा है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) और वीआईपी (VIP) नेताओं के सुर बदले हुए हैं. ये वही लोग हैं जो लोकसभा चुनाव 2019 (Loksabha Election 2019) से पहले एकता की कसमें खाते थे, लेकिन करारी शिकस्त के साथ ही सारी एकजुटता धराशायी होने लगी. इसके बाद जब अब बिहार में पांच विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव (Byelection) की घोषणा हुई तो यह और भी तार-तार होती दिखी.आखिर इन सब के पीछे वजह क्या है?

उपचुनाव में सीट बंटवारे पर फंसा पेच


दरअसल आरजेडी ने पांच में से चार सीटों पर खुद लड़ने का फैसला कर लिया, वहीं कांग्रेस ने भी सभी 5 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारने निर्णय किया है. यही नहीं जिस नाथनगर सीट पर जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने दावेदारी ठोकी थी वहां आरजेडी (RJD) ने इस सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. जाहिर है ऐसा कर आरजेडी ने अपने सहयोगी दलों को मैसेज देने की कोशिश की कि महागठबंधन में उसकी ही चलेगी

हम-कांग्रेस के अलग सुर


दरअसल लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद से ही बिहार में महागठबंधन दलों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) कई बार तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को अनुभवहीन बता चुके हैं. वहीं कांग्रेस ने भी उनके नेतृत्व को नकार दिया और मामला सोनिया गांधी और राहुल गांधी को सौंप दिया है. दूसरी ओर आरजेडी ने पलटवार करते हुए मांझी और कांग्रेस को निशाने पर लिया जबकि आरएलएसपी (RLSP) और वीआईपी (VIP) भी दबे स्वर में अपने लिए अधिक सीटों की डिमांड में लगी हुई है.

अधिक हिस्सेदारी की हर दल की चाहत


दरअसल इन दलों के बीच विरोधाभास इसलिए दिख रहा है क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव होने में अभी एक साल से अधिक का वक्त शेष है, लेकिन अधिक से अधिक सीटें अपने पाले में करने के लिए अभी से ही प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू हो गया है. बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार में कांग्रेस को छोड़कर महागठबंधन के किसी दल का खाता भी नहीं खुल पाया था. लेकिन, शून्य सीटें पाने वाली पार्टियां अभी से विधानसभा चुनाव के लिए अपनी वास्तविक हैसियत से अधिक सीटों पर दावेदारी कर रही हैं.

मांझी को चाहिए 36 तो कुशवाहा को 27 सीटें


हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की ओर से बीते जून महीने में पार्टी प्रवक्ता विजय यादव ने कहा था हम लोग बिहार में 35 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी भी 27 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर चुकी है. वहीं कांग्रेस पहले से कह रही है कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने एक सीट जीती थी इससे साबित होता है कि उनका जनाधार अधिक है, ऐसे में हिस्सेदारी भी ज्यादा होनी चाहिए.

एनडीए के लिए राह आसान


बहरहाल ऐसे में 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से एक साल पहले ही सीटों को लेकर कसरत शुरू होना महागठबंधन के भविष्य पर सवाल उठा रहा है. ऐसे भी बीते तीन दिन के भीतर महागठबंधन के भीतर जो कुछ घटा है वो एनडीए के लिए रास्ता आसान करती दिख रही है.

सबको चाहिए एक दूसरे का साथ


इसके साथ एक हकीकत ये भी है कि जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी जैसे नेताओं के लिए एनडीए में एंट्री मुश्किल है. वहीं कांग्रेस का जनाधार भी बगैर आरजेडी के बिहार में अभी उतना नहीं है जो अकेले दम पर फाइट कर सके. जबकि आरजेडी की स्थिति ये है कि बिना साथियों के वो भी कुछ नहीं कर पाएगी.

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