ऑक्सीजन संकट के बीच स्टरलाइट प्लांट पर SC में सुनवाई, कोर्ट ने कहा- वेदांता ने गलती की तो क्या लोगों को मरने दें? सोमवार को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में वेदांता की उस अर्जी पर सुनवाई हुई, जिसमें उसने तमिलनाडु स्थित स्टरलाइट प्लांट को फिर से खोलने की अनुमति मांगी है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में वेदांता की उस अर्जी पर सुनवाई हुई, जिसमें उसने तमिलनाडु स्थित स्टरलाइट प्लांट को फिर से खोलने की अनुमति मांगी है. वेदांता का कहना है कि कोविड-19 की चपेट में आए देश को ऑक्सीजन के मुक्त उत्पादन में मदद करना चाहता है. दरअसल, इस प्लांट को पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन करने के आरोप में बंद कर दिया गया था. इस मामले में केंद्र सरकार ने वेदांता के अनुरोध का समर्थन किया है. भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि देश को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है और जब पर्यावरण और मानव जीवन में से किसी एक को चुनना हो तो मानव जीवन को चुना जाना चाहिए.

इस पर सीजीआई ने कहा कि अगर तमिलनाडु में ज्यादा ऑक्सीजन है तो देश के लोगों को इसकी जरूरत है. इस पर केंद्र की ओर से एसजी तुषार मेहता ने कहा कि हमें ऑक्सीजन की जरूरत है. चाहे कंपनी चलाए या सरकार. लेकिन ऑक्सीजन आनी चाहिए. तमिलनाडु सरकार ने स्टरलाइट प्लांट खोलने का विरोध करते हुए कहा कि यह कानून और व्यवस्था में समस्या पैदा करेगा. इस बात पर सीजीआई एस ए बोबडे ने कहा कि कल तो आपने कानून- व्यवस्था के बारे में नहीं बताया था. वहीं, पीड़ित लोगों की तरफ से कहा गया कि राज्य सरकार ऑक्सीजन प्लांट चला सकती है. सीजीआई ने कहा कि इस पर हमें कोई आपत्ति नहीं हैं. अगर तमिलनाडु सरकार टेक ओवर करती है तो हमें कोई समस्या नहीं है.

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब लोग मर रहे हैं, तो सरकार कानून व्यवस्था का हवाला कैसे दे सकती है. वेदांता ने गलती की है तो क्या लोगों को मरने दें? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु सरकार हलफनामा दे और अब इस मामले में सोमवार को सुनवाई होगी. सीजीआई ने कहा कि तमिलनाडु सरकार स्टरलाइट प्लांट से ऑक्सीजन बना सकती है.